Thursday, January 30, 2014

राजस्‍थान: भाजपा का नया मुखिया कौन?

rajasthan bjp state president search
राजस्‍थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद नए मुखिया की तलाश शुरू हो गई है।

इस दौड़ में वर्तमान उपाध्यक्ष डॉ. दिगम्बर सिंह सबसे आगे चल रहे हैं। हांलाकि राज्यसभा सांसद भूपेन्द्र यादव के नाम की भी चर्चा चल रही है।

एक व्यक्ति-एक पद के सिद्धांत पर राजे ने प्रदेशाध्यक्ष पद से बुधवार रात को इस्तीफा दिया था।

सूत्रों ने बताया कि वसुंधरा राजे ने भाजपा आलाकमान को अपनी राय से अवगत करवा दिया है।

राजस्थान में सत्ता व संगठन के बीच तालमेल बेहतर ढंग से चले, इसलिए भाजपा आलाकमान भी राजे की सहमति से ही प्रदेश अध्यक्ष पद के नाम की घोषणा करेगी।

वसुंधरा राजे के पसंदीदा में से एक डॉ. दिगम्बर सिंह को इस विधानसभा चुनाव में भरतपुर राज घराने से ताल्लुक रखनेवाले विश्वेन्द्र सिंह ने हराया था।

माना जा रहा है कि डॉ. सिंह को इस हार का अच्छा तोहफा मिल सकता है।

वर्ष 2003 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में डॉ. सिंह ने विश्वेन्द्र सिंह को हराया था। इसके बाद वे पिछली वसुंधरा सरकार में चिकित्सा मंत्री रहे थे।

पीजीटी की 7466नई पोस्ट का ब्योरा जारी

Released details of new post of  7466 PGT
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में डायरेक्टर सेकेंडरी एजूकेशन की ओर से रेशनेलाइजेशन के तहत पीजीटी के 7466 पदों का ब्योरा जारी कर दिए गए हैं। सभी स्कूलों में नए पद स्वीकृत कर दिए गए हैं।

इस आदेश के बाद नए शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर आ रही दिक्कतें दूर हो जाएंगी। राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों(डीईओ) को इस संबंध में वीरवार को आदेश जारी कर दिए गए हैं।

हाल ही में पीजीटी के 11 विषयों में नए शिक्षकों के ज्वाइनिंग लेटर जारी कर दिए गए। लेकिन कई स्कूल प्रिंसिपल ने संबंधित विषय का वर्क लोड नहीं होने का हवाला देते हुए काफी शिक्षकों की ज्वाइनिंग लेने से मना कर दिया।

इस संबंध में वीरवार को डायरेक्टर सेकेंडरी एजूकेशन(डीएसई) दफ्तर में काफी शिकायतें आ पहुंची। डीएसई की ओर से जारी आदेशों में अब पीजीटी शिक्षकों को 9 से 12 वीं क्लास तक पढ़ाना होगा।

आदेशों में कहा गया है अगर संबंधित क्लास में भी पोस्ट खाली नहीं हो तो पीजीटी शिक्षकों की सेवाएं अपर प्राइमरी क्लास दी जा सकती है।

विषय-----कितने पद अलॉट किए

केमिस्ट्री---915
कामर्स----425
ज्योग्राफी---439
हिस्ट्री-----226
होम साइंस--259
गणित----2929
फिजिक्स---934
पालिटिकल साइंस-123
साइकोलॉजी---344
पंजाबी------707
सोशोलॉजी----165

बहुगुणा के इस्तीफे को लेकर रही गहमागहमी

uttarakhand cm vijay bahuguna resign
उत्तराखंड की मीडिया में द‌िनभर सीएम व‌िजय बहुगुणा के इस्तीफे देने की खबरों ने सुर्ख‌ियों में जगह बनाए रखी।

पढ़ें, पीएम की 'शरण' में उत्तराखंड के सीएम

हालांकि आधिकारिक रूप से इस खबर की अब तक पुष्टि नहीं हो पाई। ले‌किन कांग्रेस के सूत्रों ने इस खबर की पुष्टि की है। उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से लगातार नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें चल रही थीं।

पढ़ें, उत्तराखंड को 14 साल में मिले 7 मुख्यमंत्री

बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई मीटिंग के बाद से ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की विदाई तय हो गई थी।

पर्यवेक्षक आएंगे दून
इससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे और स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद को जल्द ही पर्यवेक्षक के तौर पर देहरादून भेजने की बात आ रही थी। आजाद के नाम पर चूंकि हरीश रावत खेमे को आपत्ति है, ऐसे में पर्यवेक्षक के तौर पर पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी का नाम भी सामने आ रहा है।

सोनिया गांधी के साथ प्रदेश प्रभारी और महासचिव अंबिका सोनी, गुलाम नबी आजाद, जनार्दन द्विवेदी, अहमद पटेल ने बैठक कर उत्तराखंड की राजनीतिक उठापटक पर गंभीर मंत्रणा की थी।

पढ़ें, राहुल की चली तो इंदिरा बनेंगी सीएम

मुख्यमंत्री के साथ राजनीतिक और सामाजिक समीकरण के लिहाज से प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष भी बदला जाएगा। उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन से जुड़े सवाल पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी माना था कि इस मुद्दे पर हाईकमान के यहां बैठक हुई है।

बहरहाल, मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हरीश रावत सबसे आगे माने जा रहे हैं लेकिन इंदिरा हृदयेश, प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत का नाम भी चल रहा है। अब देखना ये है कि उत्तराखंड का नया सीएम कौन होगा।

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'पीड़‌िता ने तेजपाल पर लगाए गंभीर आरोप'

startling charges against the tejpal
तहलका के संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने वाली पूर्व पत्रकार ने गोवा पुलिस में शिकायत की है कि सच को दबाने और तथ्यों को झुठलाने के साथ मुझे बदनाम करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से अभियान चलाया जा रहा है।

गोवा क्राइम ब्रांच को पीड़िता की ओर से शिकायत मिली है। साथ ही मुंबई की एक टीम ने गुरुवार दोपहर को पीड़िता के बयान भी रिकॉर्ड किए हैं।

डीआईजी ओपी मिश्रा ने बताया कि क्राइम ब्रांच की टीम के मुंबई से यहां पहुंचने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर फैसला किया जा सकेगा।

मिश्रा ने बताया, 'एक दिन पहले पीड़िता ने जांच अधिकारी से संपर्क किया था। उसने जानकारी दी कि उसे एक मेल मिला है, जिसमें दो लोगों के साथ उसकी एक तस्वीर है और केस से संबंधित आपत्तिजनक चीजें लिखी हुई हैं।

पहले से ही मुंबई में मौजूद हमारी टीम ने पीड़िता से संपर्क किया और उसने उन्हें शिकायत दे दी।'

पीड़िता ने अपनी शिकायत में कहा, 'मेरे खिलाफ चलाए जा रहे बदनामी और तिरस्कार के अभियान के दौरान आहत होने के बावजूद मैं सिर्फ इसलिए चुप रही क्योंकि मुझे कानूनी प्रक्रिया पर पूरा विश्वास है।'

‘DIG रिश्तेदार हैं, वर्दी उतरवा लेंगे’

6 men thrashed policemen in ghaziabad
शादी में आए नशे में धुत तीन युवकों ने मंगलवार रात जमकर हंगामा काटा। रोकने पर युवकों ने पुलिसकर्मियों की पिटाई कर दी। इतना ही नहीं, जब पुलिस फोर्स उन्हें गिरफ्तार करने मौके पर पहुंची तो खुद को डीआईजी का रिश्तेदार बता वर्दी उतरवाने का रौब दिखाने लगे।

पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। उनके तीन साथियों की तलाश की जा रही है। घटना उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की है।

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सिपाहियों को पीटा
एसएचओ इंदिरापुरम ने बताया कि मंगलवार रात करीब ढाई बजे कुछ युवकों के हंगामा करने की सूचना पुलिस को मिली थी। कौशांबी चौकी के सिपाही असगर अली और सुधीर मौके पर पहुंचे। कार सवार तीन युवकों ने बीच रोड पर गाड़ी खड़ी कर जाम लगाया हुआ था।

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सिपाहियों ने जब उन्हें गाड़ी साइड में लगाने को कहा तो वे उनके साथ मारपीट पर उतर आए। इस दौरान आरोपियों ने अपने तीन साथियों को बुला लिया और दोनों सिपाहियों को जमकर पीटा डाला।

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तीन गिरफ्तार, तीन फरार

मौके पर पहुंची पुलिस फोर्स ने तीन युवकों को दबोच लिया और उनकी गाड़ी सीज कर दी। इस दौरान भागने की कोशिश में युवकों ने एक गाड़ी को भी टक्कर मार दी। हालांकि युवकों के तीन साथी भागने में कामयाब रहे।

फिल्मी कहानीः एक से मोहब्बत कर बैठे दो दोस्त


युवकों ने खुद को डीआईजी का रिश्तेदार बताया और पुलिस कर्मियों को वर्दी उतरवाने की धमकी दे डाली। एसएचओ इंदिरापुरम ने बताया कि आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पकड़े गए युवकों के नाम अशोक पाठक, हिमांशु और सुधांशु हैं।

कांग्रेस को झटका, तेलंगाना बिल खारिज

andhra pradesh assembly rejects telangana bill
केंद्र सरकार को करारा झटका देते हुए आंध्र प्रदेश विधानसभा ने तेलंगाना बिल को खारिज कर दिया है।

सदन ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन बिल, 2013 को खारिज करने के लिए मुख्यमंत्री एन किरण कुमार रेड्डी के प्रस्ताव को ध्वनि मत से समर्थन दे दिया। इसके तुरंत बाद सदन स्थगित कर दिया गया।

मुख्यमंत्री के प्रस्ताव में कहा गया कि सदन आंध्र प्रदेश पुनर्गठन बिल, 2013 को खारिज करता है और राष्ट्रपति से इसे संसद में न भेजने की सिफारिश करता है।

चूंकि बिल आंध्र प्रदेश को बगैर किसी वजह, आधार या सर्वसम्मति के बांटना चाहता है इसलिए इसे संसद में न भेजा जाए।

समानता की अवहेलना
बिल में राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक समानता की अवहेलना की गई है। साथ ही इस बात भी विचार नहीं किया गया है कि राज्य को आर्थिक और प्रशासनिक तौर पर बांटना मुश्किल है।

विधानसभा अध्यक्ष नादेंदला मनोहर ने कहा कि चूंकि सरकार का प्रस्ताव मंजूर हो चुका है इसलिए इस पर अन्य सदस्यों की ओर से निजी प्रस्ताव लाने का भी कोई तुक नहीं बनता है।

बिल खारिज होने से कांग्रेस के सामने असहज हालात पैदा हो गए हैं। केंद्र 5 फरवरी से शुरू होने वाले संसद के सत्र में इसे सदन पटल पर रखना चाहता था।

विधानसभा का फैसला बाध्यकारी नहीं
सूत्रों का कहना है कि आंध्र प्रदेश विधानसभा का फैसला बाध्यकारी नहीं है इसलिए केंद्र तेलंगाना के गठन के फैसले को बरकरार रखते हुए संसद के अगले सत्र में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन बिल को सदन के पटल पर रखने से पीछे नहीं हटेगा।

गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने इस बिल को बहस के लिए सदन के पटल पर रखे जाने की घोषणा कर चुके हैं।

गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक रेड्डी की ओर से राष्ट्रपति को चिट्ठी भेज कर इस पर बहस का समय बढ़ाने की मांग करना मामले को खींचने की कोशिश थी।

'नहीं रुकेगा तेलंगाना का गठन'
इधर, आंध्र विधानसभा में अलग राज्य के गठन का बिल खारिज होने के बाद तेलंगाना राष्ट्र समिति ने मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी को आड़े हाथ लिया है।

समिति का कहना है कि विधान सभा के इस कदम के बावजूद अलग तेलंगाना राज्य का गठन नहीं रुकेगा।

आंध्र प्रदेश के उप मुख्यमंत्री सी दामोदर राजनरसिम्हा ने भी कहा है कि भले ही सदन ने बिल खारिज कर दिया हो लेकिन अलग तेलंगाना राज्य बन कर रहेगा।

केजरीवाल ने मैत्रेयी पुष्पा को क्यों दी कुर्सी, यह रही वजह!

Maitrayi pushpa praise arvind kejriwal on facebook
द‌िल्ली मह‌िला आयोग की अध्यक्ष पद के ल‌िए एक तरफ जहां दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बरखा स‌िंह आमने-सामने हैं, वहीं सोशल मीड‌िया में मैत्रेयी पुष्पा के नाम की स‌िफार‌िश करने को लेकर एक नई जंग छ‌िड़ गई है।

दरअसल सोशल मीड‌िया में मैत्रेयी पुष्पा के कुछ पुराने पोस्ट को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। मैत्रेयी पुष्पा ने अपने ऑफिशियल एकाउंट से मुख्यमंत्री अरव‌िंद केजरीवाल की तारीफ में कई स्टेटस अपलोड क‌िए थे।

अपने इन स्टेटस में मैत्रेयी पुष्पा मुखरता के साथ अरव‌िंद केजरीवाल के समर्थन में द‌िख रही हैं। मैत्रेयी पुष्पा ने केजरीवाल की नई राजनीत‌ि से लेकर सत्ता में आने के बाद उठाए गए कदमों की खूब तारीफ की है।

यहां तक की गणतंत्र द‌िवस की पूर्व संध्या से पहले देश के राष्ट्रप‌त‌ि प्रणव मुखर्जी द्वारा केजरीवाल पर की गईं ट‌िप्पण‌ियों पर मैत्रेयी पुष्पा ने असहमत‌ि दर्ज करते हुए केजरीवाल का पक्ष ल‌िया।

अब सोशल मीड‌िया में इन्हीं पोस्ट को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं क‌ि कहीं मैत्रेयी पुष्पा का यह आम आदमी पार्टी प्रेम ही तो उन्हें अध्यक्ष पद की कुर्सी तक नहीं ले जा रहा।

मैत्रेयी पुष्पा ने द‌िया जवाब
सोशल मीड‌िया पर हो रही चर्चा में जब ये सवाल उठाए गए तो मैत्रेयी पुष्पा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा क‌ि 'आप सब मेरे फेसबुक के मित्र हैं, मेरी साधारण सी पोस्ट जोड़कर कैसा तोड़ निकाला है! आप को शाबाशी ही दे सकती हूं।'

अपने इस जवाब के ज‌र‌िए मैत्रेयी पुष्पा ने बेशक अपना पक्ष रख द‌िया हो, लेक‌िन सोशल मी‌ड‌िया में आम आदमी पार्टी के इस फैसले को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।


मैत्रेयी पुष्पा द्वारा अपने फेसबुक पेज पर जनवरी में किए गए कुछ पोस्ट

दूर देश से कोई सपेरा आया , गीत क्या लाया
लिया मन छीन रे...
मीठी मीठी जादू की बजाये कोई बीन रे...' (2 जनवरी, 2014)

---- 'अगर केजरीवाल के कार्य कलाप गलत हैं तो ज्यादातर राजनैतिक पार्टियां उनके किये का अनुसरण क्यों करती चली जा रही हैं ?' (21 जनवरी, 2014 )

---- 'महामहिम उवाच : (26 जनवरी )
"जो लोग मतदाताओं का भरोसा चाहते हैं उन्हें केवल वही वादा करना चाहिए जो सम्भव है "
क्या वह वादा नहीं करना चाहिए जो राज सत्ता ने असम्भव बना दिया है , अकल्पनीय कर दिया है.…'