Monday, January 6, 2014

शादी से इंकार किया तो युवती की गला दबाकर की हत्या

Girl murdered by her boyfriend because of marriage refusal
एक तरफा प्रेम में युवक ने दो साथियों के साथ मिलकर युवती को अगवा कर लिया। जब युवती ने शादी से इंकार किया तो आरोपी ने उसकी गला दबाकर हत्या कर शव को सिकंदराबाद थाना क्षेत्र में फेंक दिया।

लोनी पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मूलरूप से बागपत जनपद की रहने वाली महकारा (18) पुत्री स्व. शेरा काफी समय से लोनी की ऋषि मार्केट कालोनी में चाचा आस मोहम्मद के घर रह रही थी।

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शुक्रवार को वह गायब हो गई थी। शनिवार शाम उसके चचेरे भाई रोहित ने कालोनी के ही सोनू उसके साथी नरेंद्र निवासी संगम विहार लोनी तथा राजेंद्र निवासी खजूरी दिल्ली पर महकारा को अगवा कर हत्या की आशंका जताकर केस दर्ज कराया था।

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पुलिस ने आरोपी सोनू को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की तो उसने अपराध कबूल कर लिया। आरोपी ने खुलासा किया कि वह महकारा से बेहद प्यार करता था और शादी करना चाहता था।

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लेकिन महकारा इसके लिए राजी नहीं थी। शुक्रवार को उसने साथी नरेंद्र एवं राजेंद्र के साथ मिलकर महकारा को अगवा कर लिया। राजेंद्र की कार में उसे सिकंदराबाद ले गए तथा रास्ते में उस पर शादी का दबाव बनाया।

इंकार करने पर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी तथा शव को सिकंदराबाद थाना क्षेत्र के लददाबांस गांव के निकट गुलावटी रोड के किनारे फेंक कर लौट आए।

शव की बरामदगी के लिए लोनी पुलिस सोनू को साथ लेकर सिकंदराबाद पहुंची तो पता चला कि वहां की पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

युवती के परिजनों ने शव की शिनाख्त कर ली है। थाना प्रभारी गोरखनाथ यादव का कहना है कि हत्या में शामिल सोनू के साथी नरेंद्र एवं राजेंद्र को गिरफ्तार कर वारदात में प्रयुक्त कार जब्त कर ली गई हैं।

RBI गवर्नर की नागरिकता का खुलासा नहीं करेगी सरकार

Nationality details of RBI governor cannot be given
सरकार ने आरटीआई एक्ट के तहत रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन की राष्ट्रीयता से जुड़े ब्योरों के खुलासे से इनकार कर दिया है।

राजन की राष्ट्रीयता से जुड़े सवालों का जवाब देने से इनकार करते हुए सरकार ने आरटीआई एक्ट के उस प्रावधान का हवाला दिया है, जिसमें कैबिनेट दस्तावेजों से संबंधित जानकारी के खुलासे से छूट मिली हुई है।

कैबिनेट सचिवालय के केंद्रीय जन संपर्क अधिकारी के मुताबिक इस मामले में वित्त मंत्रालय की ओर से नोट के तौर पर भेजा गया प्रस्ताव आरटीआई एक्ट की धारा आठ (एक ) (आई) के तहत खुलासे से छूट के दायरे में आता है।

सरकार की ओर से राजन की राष्ट्रीयता के बारे में खुलासे के इनकार से जुड़ी जानकारी सुभाष अग्रवाल की आरटीआई आवेदन के बरक्स दी गई है।

अग्रवाल ने आरटीआई एक्ट के तहत आवेदन देकर यह पूछा था कि क्या राजन इस समय अमेरिकी नागरिक हैं या पहले रहे हैं। उन्होंने इससे संबंधित और भी जानकारी मांगी थी।

अग्रवाल ने राजन के जन्म से लेकर अब तक की सारी जानकारी मांगी थी। उन्होंने राजन की राष्ट्रीयता बदलने की तारीख का भी खुलासा करने को कहा था और यह भी पूछा था कि क्या नियमों के मुताबिक भारतीय नागरिक के अलावा भी कोई आरबीआई का गवर्नर बन सकता है।

यह अलग बात है कि राजन पिछले साल एक प्रेस कांफ्रेंस में इसका खुलासा कर चुके हैं कि वह भारतीय नागरिक हैं। वह शुरू से भारतीय नागरिक रहे हैं। उन्होंने कहा था कि जब उनके पिता विदेश सेवा में थे तो उस दौरान उनके पास राजनयिक पासपोर्ट होता था।

वित्त मंत्रालय की ओर से विदेश यात्रा के दौरान भी उनके पास यह पासपोर्ट होता है। राजन ने कहा था कि उन्होंने किसी दूसरे देश की नागरिकता के लिए आवेदन नहीं किया।

रिश्तेदार ने पहले की मदद, फिर बनाने लगा हवस का शिकार

delhi woman raped by relative
एक महिला की माली हालत ठीक नहीं थी। एक रिश्तेदार ने उसकी आर्थिक मदद की। लेकिन बदले में वह उसकी अस्मत पर ही डाका डाल देगा उसे इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था।

‌रिश्तेदार लगभग दो महीने से उसे अपनी हवस का शिकार बनाने लगा। पीड़िता की शिकायत पर शनिवार को पुलिस ने आरोपी रिश्तेदार को गिरफ्तार कर लिया।

यह घटना दिल्ली के करावल नगर इलाके की है।

'बेटे का कत्ल नहीं करता तो वह मुझे खा जाता'

पुलिस के मुताबिक, 28 वर्षीय सपना (बदला हुआ नाम) ने बताया कि पड़ोस में उसका एक रिश्तेदार रणजीत रहता है। वह पेशे से प्रॉपर्टी डीलर है। कुछ दिनों पूर्व रणजीत ने आर्थिक तंगी के दौरान उसकी मदद की थी।

बीवी का दो प्रेमियों से था चक्कर, पति मारा गया!

करीब दो माह पूर्व सपना घर में अकेली थी। आरोप है कि इस बीच रणजीत ने डरा-धमका कर उससे दुष्कर्म किया। इसके बाद वह बदनाम करने और जान से मारने की धमकी देकर उससे अक्सर दुष्कर्म करने लगा।

भाई के सामने ससुराल वालों ने लूटी ‌बहन की अस्‍मत

शनिवार रात को भी पति की गैर मौजूदगी में रणजीत ने सपना से दुष्कर्म किया। परेशान महिला ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को दबोच लिया।

पेट्रोल बम के खौफ से जूझता एक देश

problem of petrol bomb in bangladesh
बांग्लादेश में चल रही हिंसा से पीड़ित का ढाका मेडिकल कॉलेज की बर्न यूनिट में इलाज चल रहा है। 26 दिसंबर की दोपहर मोहम्मद आलमगीर अपनी दुकान के लिए सब्ज़ी ख़रीद कर एक बस में बैठे ही थे कि एकाएक उनके सामने एक तेज़ विस्फोट हुआ और उनकी आँखों के सामने अँधेरा छा गया।

40 वर्षीय आलमगीर को होश आने में तीन दिन लगे। जब होश आया तो लगा चेहरे पर कोयले की भट्टी जल रही है और हाथों की उँगलियाँ ढूंढने पर भी नहीं मिल रहीं। दरअसल आलमगीर की बस जब बांग्लादेश के गाज़ीपुर ज़िले से गुज़र रही थी तो कुछ अज्ञात लोगों ने उनकी बस पर पेट्रोल बमों से हमला किया था।

जब उनकी आँख खुली तो उन्होंने ख़ुद को ढाका मेडिकल कॉलेज की 'बर्न यूनिट' यानी अस्पताल में जले हुए लोगों का इलाज करने वाले विभाग के एक बिस्तर पर पड़ा पाया। आलमगीर जब अस्पताल लाए गए थे तब उनका शरीर 62% जल चुका था।

जहाँनारा बेगम फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही हैं। उन्होंने बताया, "बस की खिड़की के पास बैठे थे, एकाएक नीचे से किसी ने कुछ बोतल की तरह का उछाला। जब गोद में गिरा तो देखा उसमे आग लगी थी और फिर कुछ याद नहीं।"

कुछ ऐसी ही कहानी 52 वर्षीय जहाँआरा बेगम की है। छह दिसंबर, 2013 की सुबह वे अपने किसी रिश्तेदार से मिलने एक ऑटो रिक्शे में बैठ कर जा रही थीं। राजधानी ढाका से बाहर निकले हुए कुछ ही मिनट हुए थे कि एकाएक ऑटो रिक्शा के दोनों तरफ दो मोटरसाईकिलें चलने लगीं और उनमे से एक के सह-चालक ने थ्री-व्हीलर के भीतर दो बड़ी बोतलें फेंक दीं।

इंसके बाद जो धामाका हुआ उसके बारे में जहाँआरा बेगम को कुछ भी याद नहीं। वो कहती हैं, "मैं तो चिल्लाने लगी थी जब लगा बदन में आग सी लग गई है। बाल झुलस रहे थे, मुँह से ख़ून बाहर आ रहा था और मैं होश भी खो रही थी।"

मोनिरुल के मुताबिक कुछ दिनों से पेट्रोल बम फेंकने की घटनाएँ बढ़ी हैं। फ़िलहाल जहाँआरा ख़तरे से तो बाहर बताईं जा रहीं हैं लेकिन शायद उम्र भर ठीक से चल सकने में उन्हें दिक्क़त रहेगी। इस तरह के तामाम हादसों के पीछे की एक ही वजह है। पेट्रोल बम।

ढाका के सह पुलिस आयुक्त मोनिरुल हसन के मुताबिक़ इस पेट्रोल बम को बनाने में महज़ एक घंटा लगता है और इसमें लागत आती है क़रीब 50 से 100 टका यानी औसतन 75 भारतीय रुपए।

पेट्रोल बम बनता कैसे है?
मोनिरुल हसन ने बताया, "एक कांच की बोतल में क़रीब पौन लीटर पेट्रोल और उनमें एक पलीता चाहिए। हमला करने से ठीक पहले पट्टी में आग लगा कर इसे निशाने पर फेंक दिया जाता है। उसके तुरंत बाद इसमें एक विस्फोट होता है जिससे इसके दायरे में आने वाले कम से कम तीन-चार लोग प्रभावित ज़रूर होते हैं।"

रहा सवाल इसके इस्तेमाल और इसकी रोकथाम का। मोनिरुल हसन ने कहा, "पिछले एक महीने से ये पेट्रोल बम फेंकने की घटनाएँ इतनी बढ़ गईं हैं कि पूरे बांग्लादेश में इनकी संख्या एक हज़ार को पार चुकी हैं। हमने मोटरसाइकिलों पर पीछे बैठने का प्रतिबन्ध लगा दिया है और सभी पेट्रोल पम्पों को निर्देश दे दिए गए हैं कि खुला तेल न बेचें।"

लकिन हक़ीक़त यही है कि आज बांग्लादेश एक ऐसे हमले से ख़ौफ़ में हैं जिसके बारे में यहाँ के लोगों ने कुछ महीने पहले तक सुना भी नहीं था और देखा भी नहीं था। मैं जब पेट्रोल बम से हताहत हुए लोगों की सुध लेने अस्पताल पहुंचा और वहाँ पड़े बिस्तरों का तांता देखा तो लगा कि ये पेट्रोल बम हमले तो महामारी की शक्ल अख्तियार करते जा रहे हैं। कई ऐसे मरीज़ देखे जिनके बारे में न तो यहाँ पर लिखने लायक़ है और न ही आपको बताने लायक, क्योंकि वे ज़िन्दगी और मौत के बीच बस करवट ले रहे थे।

डॉक्टर सेन कहते हैं कि घायलों को प्लास्टिक सर्जरी तक करानी पड़ सकती है। ख़ुद ढाका मेडिकल कॉलेज में वर्ष 1986 में बर्न यूनिट को स्थापित करने वाले डॉक्टर शुमंतोलाल सेन ने स्वीकार किया कि इस तरह के मामले उन्होंने अपने करियर में पहले कभी नहीं देखे। उन्होंने बताया, "आज की तारीख़ में पूरे बांग्लादेश मे इस तरह की एक ही सुविधा है। लेकिन हिंसा के चलते हमारे ऊपर इतना दबाव है कि मरीज़ फ़र्श पर लेते हैं। पेट्रोल बम से नुक़सान यही है कि प्रभावित व्यक्ति आग को सांस में लेने पर मजबूर हो जाता है।"

"सिर्फ़ हमारे यहाँ, पिछले एक महीने में हम 84 ऐसे लोगों के इलाज में लगे रहे हैं। उनमे से 19 की मौत यहीं पर हुई। दूसरों का इलाज किसी तरह जारी है।"

डॉक्टर शुमंतोलाल सेन ने कहा कि पेट्रोल बम हमले में घायल हुए लोगों का इलाज करने के साथ साथ उनकी प्लास्टिक सर्जरी भी करनी पड़ती है क्योंकि शरीर में बुरे घाव होने के कारण उनकी त्वचा पूरी तरह जल चुकी होती है।

हेलमेट पहना हुआ ट्रेन का ड्राइवर, बांग्लादेश
बांग्लादेश में डर का ये आलम है कि ट्रेन के ड्राइवर हेलमेट पहनकर गाड़ी चला रहे हैं। अबु मियाँ की हालत ठीक वैसी है जैसी डॉक्टर शुमंतोलाल सेन ने बयान की थी। इनका चेहरा हमेशा के लिए ख़राब हो चका है और हाथ की उँगलियों को एक दूसरे से अलग करने के लिए प्लास्टिक सर्जरी के बावजूद कई वर्ष लगेंगे। अबु एक मिस्त्री का काम करते हैं और ढाका से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर अपने गहर को जा रहे थे जब इनकी बस में एक एक करके तीन पेट्रोल बम फेंके गए।

दुर्भाग्यवश एक बम इनकी गोद में आकर गिरा और इनके चेहरे और हाथ पर असर कर गया। रोज़ दिहाड़ी कमा कर के घर चलाने वाले 42 वर्षीय अबु मियां कब ठीक होंगे इसका न तो उन्हें पता है न ही घर में इंतज़ार कर उनके बच्चों को। लेकिन इस बात का पता सभी को है कि पिछले एक महीने से बांग्लादेश में चुनाव में हिस्सा लेने या न लेने को लेकर जो राजनीतिक खींचा तानी चल रही है, उसमें ज़्यादातर निर्दोष लोग ही चपेट में आ रहे हैं।

‘आप’ का उदय सभी पार्टियों के लिए चेतावनी: रमेश

AAP's emergence a warning for all parties: Jairam
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि आम आदमी पार्टी (आप) का उदय देश की स्थापित पार्टियों के लिए चेतावनी है। अगर राजनीतिक दलों ने जनता के हितों की अनदेखी जारी रखी तो वह बहुत जल्द ही इतिहास हो जाएंगे।

रमेश ने रविवार को कहा कि 'आप' ने एक तरह से देश के राजनीतिक परिदृश्य को फिर से परिभाषित किया है। इसने पूरी राजनीतिक प्रक्रिया को सावधान कर दिया है। 'आप' का असर अभी सिर्फ दिल्ली में ही है। लेकिन अगर कांग्रेस, भाजपा और अन्य क्षेत्रीय दलों ने जनता के हितों पर ध्यान नहीं दिया, तो वह बहुत जल्द ही इतिहास बन जाएंगे।

उन्होंने कहा, 'दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप की जीत एक तरह से लोगों के आवाज की जीत है। रमेश मध्य गुजरात के शहर नाडियाद में एक कैंसर अस्पताल का उद्घाटन करने आए थे।

'शीला के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?'

arvind kejriwal wants more time for action against sheela
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फिर दोहराया है कि भ्रष्टाचारियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। केजरीवाल के मुताबिक वह कितना भी रसूखदार क्यों ना हो अगर उसके खिलाफ सबूत मिला तो कार्रवाई जरूर होगी।

योगगुरु बाबा रामदेव के उठाए इस सवाल पर कि सत्ता में आ जाने के बावजूद उन्होंने अब तक दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की है, जबकि उन्होंने खुद कॉमनवेल्थ गेम्स में घोटाले के सबूत दिखाए थे।

केजरीवाल ने कहा कि अब तक उन्होंने शीला दीक्षित सरकार के खिलाफ 370 पन्नों की जो भ्रष्टाचार संबंधी रिपोर्ट बनाई थी, वो मीडिया रिपोर्ट पर आधारित थी। इसलिए उन्हें इन तथ्यों को जुटाने और कार्रवाई करने के लिए वक्त चाहिए।

कार्रवाई का भरोसा
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री हो या फिर आम आदमी पार्टी का कोई नेता अगर वह भ्रष्टाचार में मिला तो उसके खिलाफ कार्रवाई अवश्य होगी।

केजरीवाल ने कहा कि उनकी सरकार को बने अभी आठ दिन ही हुए हैं, इसलिए उन्हें एंटी करप्शन विभाग को दुरुस्त करने और कार्रवाई के लिए थोड़ा वक्त चाहिए।

केजरीवाल के मुताबिक कार्रवाई से पहले एंटी करप्शन विभाग को भी ठीक करना जरूरी है। केजरीवाल आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने के लिए जाते वक्त पत्रकारों से बात कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि सरकारी सिस्टम को सुधारने के लिए थोड़ा समय लग रहा है। इसके बाद कॉमनवेल्थ गेम्स हो या कोई दूसरा घोटाला। उसमें तथ्यों के आधार पर जो भी दोषी पाया जाता है उस पर कार्रवाई जरूर की जाएगी।

'भारत ने जड़ा अमे‌रिका के मुंह पर तमाचा'

India is now a cryogenic rocket power
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार को जियोसिनक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (भू-स्थैतिक उपग्रह प्रक्षेपण वाहन) यानी क्लिक करें जीएसएलवी डी-5 का सफल प्रक्षेपण किया जो इस लिहाज से अहम था कि इसमें क्लिक करें भारत का अपना क्रायोजेनिक इंजन लगा हुआ था।

ये वही इंजन है जिसे भारत को विकसित करने में बीस वर्ष का समय लगा, जिसकी तकनीक को भारत अपने पड़ोसी देश रूस से हासिल करना चाहता था, लेकिन अमरीका के दबाव में रूस ने भारत को ये तकनीक नहीं दी थी।

बीस वर्ष बाद ही सही भारत ने क्लिक करें क्रायोजेनिक इंजन की तकनीक में महारथ हासिल कर ली है।इस तकनीक का महत्व इस तथ्य में निहित है कि दो हज़ार किलो वज़नी उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए क्रायोजेनिक इंजन की सख़्त ज़रूरत पड़ती है।

इसकी वजह ये है कि इसी इंजन से वो ताक़त मिलती है, जिसके बूते किसी उपग्रह को 36,000 किलोमीटर दूर स्थित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया जाता है। इस सफल प्रक्षेपण के साथ ही ये कहा जा सकता है कि भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में अब हर तरह की उपलब्धि हासिल कर ली है।

भारत का छोटा रॉकेट पीएसएलवी (पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल) यानी ध्रुवीय प्रक्षेपण यान बहुत क़ामयाब है। भारत अपने उपग्रह ख़ुद बना रहा है। क्रायोजनिक इंजन भारत के संचार उपग्रहों को भी प्रक्षेपित करेगा। भारत जब अपना चंद्रयान-2 मिशन आरंभ करेगा, उसके लिए भी जीएसएलवी की ज़रूरत होगी।

अमरीका ये कहकर इस तकनीक को भारत से दूर रखने की कोशिश करता रहा कि वो इसका इस्तेमाल अपने सैन्य ताक़त बढ़ाने में कर सकता है। लेकिन भारत ने अपना अंतर-महाद्वीय प्रक्षेपास्त्र अग्नि-5, क्रायोजेनिक इंजन से पहले विकसित करके दिखाया जिसकी मारक क्षमता पांच हज़ार किलोमीटर से अधिक है।

भारत ने अग्नि-5 के दो सफल प्रक्षेपण किए और ख़ास बात ये है कि ये प्रक्षेपास्त्र ठोस रॉकेट ईंधन से चलता है। भारत ने उसे क्रायोजनिक इंजन से नहीं चलाया है। भारत शुरू से ही ये कहता रहा था कि वो क्रायोजेनिक तकनीक का इस्तेमाल अपनी असैन्य ज़रूरतों को पूरा करने के लिए करेगा और उसने ऐसा करके भी दिखाया। भारत ने इसे अपने असैन्य अंतरिक्ष कार्यक्रम तक सीमित रखा।

भारतीय रक्षा एवं अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख पहले भी ये कहते रहे हैं कि भारत क्रायोजेनिक इंजन से अपने प्रक्षेपास्त्रों को नहीं चलाएगा।