Thursday, December 26, 2013

यह शख्स कमाता है रोजाना 254 करोड़!

adelson made 254 crore rupees per day in 2013
यदि कोई कहे कि किसी शख्स की रोजाना की आमदनी 254 करोड़ रुपए है तो चौंकना स्वभाविक है। लेकिन ये सच है कि कारोबारी शेल्डन एडेल्सन ने इस साल 15 बिलियन डॉलर कमाए।
दुनिया के सबसे बड़े कैसिनो ऑपरेटर शेल्डन एडेल्सन का लॉस वेगास, मकाउ और सिंगापुर में कारोबार फैला हुआ है। जुए के कारोबारी एडेल्सन जल्द ही अपनी कंपनी को जापान, कोरिया और अन्य मुल्कों में शुरू करने जा रहे हैं।
फोर्ब्स मैग्जीन ने भी इस पर अपनी मुहर लगाते हुए इस साल सबसे अधिक कमाने वालों की लिस्ट जारी की है।


फोर्ब्स की इस लिस्ट में फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग भी शामिल हैं, जिन्होंने 13.6 बिलियन डॉलर कमाए। इस साल हर दिन उनकी जेब में 230 करोड़ रुपए आए।
तीसरे पायदान पर अमेजन के संस्‍थापक जेफ बेजोस रहे और उन्होंने अपनी संपत्ति में 13.3 बिलियन डॉलर का इजाफा किया।
हालांकि इस बार दिग्गज निवेशक वॉरेन बफेट मात खा गए और चौथे पायदान पर रहे। रोजाना उनकी आमदनी 205 करोड़ रही और इस साल बफेट ने 13.3 बिलियन डॉलर कमाए।
वहीं पांचवें, छठे, सातवें और आठवें पायदान पर एक ही परिवार 'वाल्टन्स' का कब्जा रहा। यह परिवार रिटेल मार्केट से जुड़ी वॉलमार्ट कंपनी का मालिक है।
वहीं गूगल के सह-संस्‍थापक लैरी पेज और माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स क्रमशः नौवें और दसवें पायदान पर रहे।

यौन शोषण से बचकर भागे थे जुवेनाइल!

juveniles sexualy abused in meerut observation home says boy
मेरठ के बाल सुधार केंद्र से भागे एक कैदी ने सनसनीखेज खुलासा किया है। उसने बताया है कि केंद्र में बाल कैदियों का यौन और शारी‌रिक शोषण किया जाता है। इस कारण से ही 18 दिसंबर को 43 बाल कैदी वहां से फरार हो गए।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार
, आरोपी कैदी ग्रेटर नोएडा का रहने वाला है। उसने बताया ‌कि बाल सुधार केंद्र में उम्र में बड़े कैदी बाल कैदियों का यौन और शारी‌रिक शोषण करते हैं। इस खुलासे के बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार सुरक्षा आयोग ने मामले की जांच के ओदश दे दिए हैं।
'मेरे साथ सेक्स करो, वर्ना मैं खुदकुशी कर लूंगा...'
बाल कैदी ने बताया कि 18 दिसंबर को सुधार केंद्र से भागकर वह अपने घर आ गया। 20 दिसंबर को उसने इंडिया सुरक्षा चाइल्डलाइन से संपर्क किया। वह पुलिस से इस मामले की शिकायत नहीं करना चाहता था।
बाथरूम में नहा रही थी चाची, भतीजे ने किया कांड
इसके बाद चाइल्डलाइन ने राष्ट्रीय बाल अधिकार सुरक्षा आयोग को इस मामले को लेकर पत्र लिखा। जिसमें बताया गया है कि सुधार केंद्र में फिलहाल 25 साल की उम्र के 20 से अधिक कैदी हैं। वे अक्सर बाल कैदियों पर रॉड से हमला कर देते हैं। चार बाल कैदियों को गंभीर चोटें लगी हैं।
दस खूनी वारदातें, जिन्हें पढ़कर दहल उठेंगे आप!
चाइल्डलाइन ने बाल कैदियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया है कि बालिग कैदी कई बार सुधार केंद्र के सुरक्षाकर्मियों को धमकी भी देते हैं।
आयोग ने पत्र का संज्ञान लेते हुए जांच का आदेश दे दिया है। चाइल्डलाइन के सदस्य 21 दिसंबर को बाल कैदी को मेरठ ले गए।

15 दिन में पूरा नहीं हो सकता यह वादा!

not easy to get passed jan lokpal bill in 15 days
आम आदमी पार्टी के संयोजक और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने जा रहे अर‌विंद केजरीवाल का कहना है कि वह सरकार बनने के 15 दिन के भीतर जन लोकपाल बिल पारित कर देंगे।
लेकिन यह इतना आसान नहीं है। जानकारों का कहना है कि इस बिल को पारित कराने के लिए केजरीवाल को केंद्र सरकार से मंजूरी लेने की जरूरत होगी, जो 15 दिन में मुमकिन नहीं लगता।
केजरीवाल ने दोहराया वादा
कौशांबी में बात करते हुए बुधवार को केजरीवाल ने स्वीकार किया था कि जन लोकपाल को लेकर काफी अवरोध सामने आएंगे, लेकिन आम आदमी पार्टी इन दिक्कतों को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है।
नए चुटकुलों से केजरीवाल की टेंशन बढ़ी!
देश के संविधान के मुताबिक दिल्ली विधानसभा ऐसे किसी भी मुद्दे पर कानून बना सकती है, जो संविधान के नियमों का उल्लंघन न करता हो।
ब्रिटिश काल के कानून पर ऐतराज
केजरीवाल ने कहा, "लेकिन कांग्रेस कह रही है कि 2002 में ट्रांजैक्‍शन ऑफ बिजनेस रूल्स में संशोधन किया गया था और इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार को किसी भी तरह का कानून बनाने से पहले केंद्र सरकार उसे उसकी इजाजत लेनी होगी।"
मुख्यमंत्री बनने के बाद शुरू होगा केजरीवाल का सत्याग्रह
उन्होंने कहा, "यह गलत है। ऐसा ब्रिटिश काल में होता था। तब भारत से जुड़े सभी प्रशासनिक फैसलों को मंजूरी के लिए लंदन भेजा जाता था। लेकिन अब हम आजाद मुल्क हैं और आम जनता सरकार बनाती है।"
जानकारों के मुताबिक, 15 दिन नाकाफी
जानकार बताते हैं कि लोकपाल बिल पारित कराने की प्रक्रिया 15 दिन में पूरा होना संभव नहीं है। इसके लिए विधानसभा का सत्र बुलाकर सबसे पहले जन लोकपाल बिल पारित कराना होगा।
अगर बिल पास हो जाता है, तो इसे उप-राज्यपाल के पास भेजा जाएगा, जो इसे और आगे गृह मंत्रालय के पास भेजेंगे। गृह मंत्रालय सलाह-‌मश‌विरा करेगा और तब इस पर फैसला लेगा।
गृह मंत्रालय के पास जाएगा बिल
उसके बाद यह वापस आएगा उप-राज्यपाल के पास आएगा, जहां इस पर फैसला होगा। यह साफ है कि आम आदमी पार्टी भले इस बिल पर अपनी तरफ से कदम बढ़ा दे, लेकिन पास कराना 15 दिन में मुमकिन नहीं है।
पार्टी के नेता संजय सिंह का कहना है कि केजरीवाल ने जो वादा किया है, उसे पूरा किया जाएगा। आम आदमी पार्टी अपनी तरफ से अपनी तरफ से जल्द से जल्द पहल कर देगी, इसके बाद प्रक्रिया पूरा होने में जो वक्‍त लगेगा, उतना लगना ही है।

'दो साल के अखिलेश शासन में हुए सैकड़ों दंगे'

hundreds of riots during akhilesh govt
तहरीक उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय सचिव मौलाना आफताब कासमी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार मुजफरनगर दंगा पीड़ितों को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। यही वजह है कि आज तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई।
मौलाना आफताब कासमी ने दंगे की भेंट चढ़े मुफ्ती मुनव्वर कासमी के हत्यारों को शीघ्र गिरफ्तार किये जाने की मांग उठाते हुए कहा कि अपने को मुसलमानों का सबसे बड़ा हितैषी कहनी वाली सपा सरकार मुजफ्फरनगर और शामली में राहत शिविरों में रह रहे दंगा पीड़ितों के दुख दर्द से मुंह मोड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सपा सरकार के दो साल के कार्यकाल में सैकड़ों दंगे हो चुके हैं। प्रदेश सरकार सांप्रदायिक ताकतों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं कर रही। इससे उनके हौसले बुलंद हो रहे हैं।
पढ़ें, दंगा: इतनी खौफनाक हैं कैंपों की हकीकत!
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुजफ्फरनगर दंगे के सिलसिले में किसी भी मुसलमान नौजवान को झूठे मुकदमे में फंसाकर गिरफ्तार करने की कोशिश की गई तो तहरीक उलेमा-ए-हिंद सड़कों पर उतरने को बाध्य होगी।
उन्होंने सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के राहत शिविरों संबंधी बयान पर भी रोष व्यक्त किया।

कांग्रेस को झटका, AAP की हुईं अलका

congress leader alka lamba announced to join aap
अरविंद केजरीवाल के दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से ठीक पहले गुटबाजी से जूझ रही प्रदेश कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है।
कांग्रेस की युवा नेता अलका लांबा ने पार्टी छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल होने की घोषणा की है। अलका लांबा ने अपने ट्विटर पेज पर इस बात की जानकारी दी।
अलका ने अपने ट्विटर पेज पर‌ लिखा है, '20 साल बिताने के बाद अब कांग्रेस और उसके नेतृत्व को गुडबाय कहने का वक्त आ गया है, मैं कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को धन्यवाद कहूंगी।'
पढ़िए:- 'मैं तीन साल राहुल से मिलने का इंतजार करती रही...'
उन्होंने आगे लिखा, 'मेरा कसूर: जिनके लिए (कांग्रेस) अभी तक गाली खाई वो कोई और नहीं, मेरे अपने ही थे और जिनसे (आप) गाली खाई अब वो मेरे अपने से लगते हैं।'
ट्वीट में उन्होंने कहा, 'मेरी गलती: आप ने मेरे सामने विधानसभा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा था लेकिन उस समय मैं इसके लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थी, अब फिर से गेंद उनके पाले में है।'
अलका लांबा कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई की अध्यक्ष और राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं।

मोदी की मुसीबतः केंद्र कराएगा जासूसी कांड की जांच

modi in problem, centre decide to investigate snoopgate of gujarat
भाजपा के पीएम पद के दावेदार और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को गुरुवार को तगड़ा झटका लगा। केंद्र सरकार ने जासूसी कांड की जांच एक जांच आयोग के माध्यम से कराने का फैसला किया है।
यह कांड बीते कुछ दिनों से मोदी के गले की हड्डी बना हुआ है। दरअसल, यह मामला एक युवती की गैरकानूनी जासूसी से जुड़ा है, जिसमें सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल हुआ।
सीनियर आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा की जासूसी का आरोप भी लगाया गया है। कैबिनेट ने इस मामले में अब जांच आयोग के गठन का फैसला किया है।
इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस फैसले का स्वागत करते हुआ कहा कि यह काफी पहले हो जाना चाहिए था।
केंद्र सरकार के इस फैसले की बीजेपी ने निंदा की है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने कहा है कि वो केंद्र सरकार के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती देंगे क्योंकि यह विषय राज्य सूची का मामला है।
उधर बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि मोदी को कांग्रेस की तरफ से परेशान करना, कोई नई बात नहीं है। मोदी कभी भी किसी के दबाव में नहीं आते।
भाजपा ने कांग्रेस को कहा फासीवादी
इस पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता निर्मला ‌सीतारमण ने कहा कि यह कांग्रेस की फासीवादी मानसिकता का प्रतीक है। आम लोग उसके खिलाफ हैं, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे।
निर्मला ने कहा कि कांग्रेस बौखला गई है और मोदी को जबरन फंसाने की राजनीतिक साजिश रच रही है। जांच का अधिकार राज्य को होता है और इस मामले में पहले ही जांच शुरू हो चुकी है, जिसमें रिटायर जज शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सीखने का नाम नहीं ले रही। लोकतंत्र में राजनीतिक विरोधियों से चुनावों में निपटा जाता है, जबकि वह वह सीबीआई और दूसरी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है।
'साहेब' लपेटे में
ऐसा बताया जा रहा है कि यह जासूसी मोदी के बेहद करीबी अमित शाह के इशारे पर हुई, जो उस वक्‍त गुजरात के गृह मंत्री थे।
इस सर्विलांस की जिन टैप का खुलासा हुआ है, उनमें शाह और गुजरात के आला अधिकारी बार-बार किसी साहेब का जिक्र कर रहे हैं। विरोधियों का कहना है कि यह साहेब कोई और नहीं, बल्कि मोदी हैं।
इस युवती को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ से हुई गैरकानूनी सर्विलांस पर खड़े बवाल में बुधवार को नया मोड़ आया था।
इनवेस्टिगेटिव वेबसाइट गुलेल ने दावा किया है कि उसके पास 39 नए सीक्रेट टैप हैं, जिससे पता चला है कि युवती पर गुजरात से बाहर भी निगाह रखी गई थी।
ऐसा कहा जा रहा है कि नए टैप से साफ हो रहा है कि सरकारी मशीनरी की मदद से हुए इस सर्विलांस का लक्ष्य युवती को बचाना नहीं, बल्कि उसका पीछा करना और उसकी निजी जिंदगी में तांकझांक करना है।
'साहेब तक पहुंचाई गई जानकारी'
गुलेल का दावा है कि पिछले टैप की तरह नए वालों में भी इस गैरकानूनी ऑपरेशन में शामिल अधिकारी जी एल सिंघल, ए के शर्मा और अमित शाह यह जानकारी अपने से किसी सीनियर तक पहुंचाने की बात कर रहे हैं, जिन्हें बार-बार साहेब कहा गया।
ऐसा भी माना जा रहा है कि इस मामले की जांच के लिए आयोग गठित करने का फैसला मोदी को घेरने की कोशिश है, जो आगामी लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

BREAKING: मोदी को राहत, क्लीन चिट पर कोर्ट की मुहर

relief to modi, court dismiss zakia plea over sit's clean chit
गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी को अहमदाबाद की कोर्ट ने राहत देते हुए जाकिया जाफरी की याचिका खारिज कर दी।
मोदी को दंगे से जुड़े मामले में एसआईटी ने क्लीन चिट दी थी और जाकिया जाफरी ने इस फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की थी। लेकिन कोर्ट की राय उनसे जुदा रही।
हालांकि अदालत ने याचिका खारिज करते हुए यह भी कहा कि जाकिया जाफरी हाई कोर्ट में अपील कर सकती हैं।

300-350 पेज का आदेश

एसआईटी के वकील आर एस जमुआर ने इस मौके पर कहा‌ कि फिलहाल वह इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता सकते, क्योंकि उन्होंने आदेश पूरी तरह नहीं पढ़ा है, क्योंकि 300-350 पेज का आदेश है।
पढ़िए:- मोदी की मुसीबतः केंद्र कराएगा जासूसी कांड की जांच
जमुआर ने कहा कि जांच के दौरान कोई सबूत या साक्ष्य नहीं मिला, ऐसे में मोदी पर दंगों का केस नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में फैसला आने के बाद अब मोदी पर कोई भी आपराधिक मामला लंबित नहीं है। अगर कोई प्रशासनिक चूक का मामला हुआ, तो बात अलग है। ऐसे मामलों में सुधार की सलाह दी जाती है।
जाकिया जाफरी आगे अपील कर सकती हैं
जमुआर के मुताबिक अदालत ने कहा कि जाकिया जाफरी आगे अपील कर सकती हैं और यह पूरी तरह उन पर निर्भर है। हमने अदालत के सामने कहा था कि एसआईटी के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो कि मोदी ने लोगों को भड़काया था। संजीव भट्ट की बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता और अदालत ने यह बात मानी है।
साल 2002 में हुए गुजरात दंगे में राज्य के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और 58 अन्य को मिली क्लीन चिट को चुनौती देने वाली जाकिया जाफरी की याचिका पर एक अदालत बृहस्पतिवार को फैसला सुनाया गया।
संजीव भ्‍ाट्ट नाराज
निलंबित पूर्व आईपीएस अधिकारी और इस मामले से जुड़े संजीव भट्ट ने फैसले पर नाखुशी जताते हुए कहा कि आजाद भारत के इतिहास में न्याय के लिहाज से यह काला दिन है। गुनहगारों को सजा नहीं मिली है। या तो चीजें अदालत के सामने नहीं रखी गई या अदालत उन पर ठीक से गौर नहीं कर पाई।
उम्मीद है कि इस मामले से जुड़े लोग आगे ऊपरी अदालत में अपील करेंगे। यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई और इंसाफ मिलने तक इसे जारी रखना होगा।
सितंबर 2013 में ही बहस पूरी
दंगों की जांच करने वाली एसआईटी ने मोदी को क्लीन चिट दी थी। मजिस्ट्रेट बीजे गनात्रा ने इससे पहले कहा था कि वह 28 अक्टूबर को फैसला सुनाएंगे, लेकिन बाद में दो दिसंबर और फिर 26 दिसंबर तक के लिए इसे टाल दिया गया।
इस मामले में सितंबर 2013 में ही बहस पूरी हो गई थी। दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसायटी जनसंहार में 69 लोगों के साथ अपने पति और कांग्रेस सांसद एहसान जाफरी को खोने वाली जाकिया जाफरी ने दंगों का कथित षड्यंत्र रचने के लिए मोदी और अन्य के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एसआईटी ने जाफरी के आरोपों की जांच की थी। उसने आठ फरवरी 2012 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है।