Sunday, December 22, 2013

दंगों पर सियासत कर रही है कांग्रेस: अखिलेश

akhilesh yadav comments on rahul shamli's trip
प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि मुजफ्फरनगर मसले पर कांग्रेस सिर्फ सियासत कर रही है।

अगर कांग्रेस के पास राहत कैंपों से पीडि़तों को घर भेजने का कोई उपाय व मशविरा है तो समाजवादी पार्टी की सरकार उसे अपनाने के लिए तैयार है।

सपा कभी भी दुख व दंगों पर राजनीति नहीं करती है। अखिलेश यादव रविवार को राजधानी लखनऊ में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों के सवालों के जवाब दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि सरकार की भी यही कोशिश है कि राहत कैंपों में रह रहे दंगा पीडि़त परिवारों को किसी तरह अपने गांव व घर भेजा जाए।

इसीलिए सरकार ने घर बनाने के लिए पांच लाख रुपये की सहायता का ऐलान किया था। इसके बावजूद दंगा पीडि़त अपने घरों को नहीं लौट रहे हैं।

गौरतलब है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी रविवार सुबह अचानक मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों से मिलने शामली पहुंच गए। उन्होंने वहां तीन राहत कैंपो का दौरा किया।

मुजफ्फरनगर पहुंचे राहुल को लोगों ने दिखाए काले झंडे

rahul gandhi visits shamli
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी रविवार सुबह अचानक मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों से मिलने शामली पहुंच गए।

उन्होंने वहां तीन राहत कैंपो का दौरा किया और पीड़ितों की दिक्कतों को जाना। हालांकि इस दौरान उन्हें काले झंडे दिखाए गए और कई जगह कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी भी सुननी पड़ी।

राहुल के आईएसआई वाले बयान पर लोगों में जबर्दस्त गुस्सा दिखा यही वजह रही कि वे लोई राहत शिविर में नहीं जा सके।

बताते चलें कि आज सुबह अचानक सड़क मार्ग से बिना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी दंगा पीडि़तों का हालचाल लेने मलकपुर राहत शिविर पहुंचे।

उन्होंने तंबुओं में जाकर पीडि़तों से बातचीत की और उनकी मुश्किलों के बारे में जानकारी ली।

अकबरपुर सुन्हेटी गांव के पास जिस समय राहुल गांधी का काफिला गुजरा तो वहां लगे शिविर के लोग उनकी गाड़ी के सामने आकर रूकने की मांग करने लगे। राहुल गांधी यहां भी रूके और कैंप में जाकर समस्याएं सुनी।

दंगा पीडि़तों ने राहुल गांधी से कहा कि वह अपने गांव नहीं लौटेंगे। उन्होंने जमीन व छत उपलब्ध कराने की मांग रखी।

राहुल ने आरोप लगाया कि जिन सांप्रदायिक ताकतों ने दंगों की साजिश रची थी, वे नहीं चाहते कि दंगा पीड़ित वापस अपने घर लौटे।

उन्होंने यह भी कहा कि वह दंगा पीडि़तों की समस्याएं सुनने के लिए ही यहां आए हैं। उन्होंने लोगों को समस्याएं सुलझाने का भरोसा दिया।

राज्य सरकार भी दंगा पीड़ितों की मदद नहीं कर पा रही है। राहुल के साथ यूपी के प्रभारी मधुसूदन मिस्‍त्री और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह थे। कांग्रेस के शामली जिलाध्यक्ष अयूब जंग भी उनके साथ थे।

राहुल गांधी को वहां मौजूद अफसरों ने बताया कि सरकार दंगा पीड़ितों को मुआवजे के तौर पर 44 करोड़ रुपए बांट चुकी है और राहत शिविरों में पूरी सहूलियतें उपलब्‍ध कराई जा रही हैं।

राहुल ने दंगा पीड़ितों से कहा कि वे घर नहीं लौटेंगे, तो दंगा कराने वाले इन हालात का सियासी फायदा उठाएंगे।

पिछले कुछ दिनों से ठंड के कारण राहत शिविरों में बच्चों के मरने की खबरें आ रहीं थी। बीते दो दिनों से केंद्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम ने भी यहां पहुंचकर राहत शिविरों का जायजा लिया था।

गौरतलब है कि सितंबर में मुजफ्फरनगर में हुए दंगों में 60 लोगों की जान चली गई थी और करीब 50 हजार लोगों ने घर छोड़ दिया था।

Saturday, December 21, 2013

समलैंग‌िकों के समर्थन में केंद्र, पुनर्विचार याचिका दायर

government filed reconsideration plea in homosexual issue

खास-खास

सरकार के कदम
  • संशोधन से बचने के लिए केंद्र ने लगाई जुगत
  • सरकार ने अपने ही कानून को पुनर्विचार याचिका में बताया त्रुटिपूर्ण
  • कहा, सर्वोच्च अदालत के फैसले का बचाव नहीं किया जा सकता
कानून बनाने और उसमें बदलाव करने में सक्षम केंद्र सरकार अप्राकृतिक यौनाचार को दंडनीय अपराध करार देने वाली आईपीसी की धारा 377 में खुद संशोधन करने की बजाय सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंच गई है।

एक तरफ कुआं और एक तरफ खाई से बचने की जुगत लगाते हुए सरकार ने सर्वोच्च अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर कर उस फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया है, जिसमें धारा 377 को संवैधानिक ठहराया था।

सरकार ने समलैंगिक वयस्कों में स्वेच्छा से यौन संबंध बनाने को अपराध के दायरे से बाहर करने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त करने की व्यवस्था पर सर्वोच्च अदालत से पुनर्विचार की मांग की है।

मौजूदा कानून के तहत अप्राकृतिक यौनाचार दंडनीय अपराध है, जिसके लिए उम्रकैद की सजा तक का प्रावधान है। सरकार ने पुनर्विचार याचिका में कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करने के शीर्षस्थ अदालत की ओर से 11 दिसंबर को दी गई व्यवस्था का बचाव नहीं किया जा सकता।

केंद्र की इस याचिका को एजी गुलाम ई वाहनवती ने अंतिम रूप दिया है, जिसमें अदालत से याचिका का निपटारा करने से पहले ओपन कोर्ट में मौखिक दलीलें पेश करने की अनुमति देने का आग्रह किया गया है।

पुनर्विचार के लिए दिए 76 आधार
पुनर्विचार याचिका में सरकार ने 11 दिसंबर के निर्णय पर फिर से विचार करने के लिए 76 आधार दिए हैं।

याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय त्रुटिपूर्ण ही नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों के बारे में दिए गए सिद्धांतों के खिलाफ है।

गृह मंत्रालय ने पुनर्विचार याचिका में कहा है कि एकांत में सहमति से यौन संबंध स्थापित करने को अपराध करार देने वाली आईपीसी की धारा 377 का प्रावधान संविधान में दिए गए समानता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

याचिका में कहा गया है कि प्राकृतिक व्यवस्था के खिलाफ संबंध बनाने को अपराध करार देने वाली धारा 377 ब्रिटिश काल के पुराने कानूनों के मुताबिक है जिसे भारत में 1860 में शामिल किया गया था।

याचिका के अनुसार इसकी कोई कानूनी शुद्धता नहीं है और यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के मद्देनजर गैरकानूनी है। याचिका में यह तर्क भी दिया गया है कि शीर्षस्थ अदालत ने भी यह व्यवस्था दी है कि एक कानून जो लागू किए जाने के समय न्यायोचित था समय के साथ मनमाना और अनुचित हो सकता है।

फैसले के निष्कर्ष सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्थाओं के विपरीत : केंद्र
सरकार ने पुनर्विचार याचिका में यह दलील भी दी कि फैसले में दिए गए सर्वोच्च अदालत के तमाम निष्कर्ष इसी न्यायालय की ओर से दी गई तमाम व्यवस्थाओं के विपरीत है।

याचिका के अनुसार सरकार ऐसे ही प्रत्येक निष्कर्ष पर सवाल उठा रही है जो पिछली व्यवस्थाओं के मद्देनजर त्रुटिपूर्ण नजर आते हैं।

सर्वोच्च अदालत के फैसले को मध्ययुगीन और प्रतिगामी बताते हुए कहा गया है कि शीर्षस्थ अदालत ने सुनवाई के दौरान केंद्र की इस दलील पर विचार ही नहीं किया कि हाईकोर्ट के निर्णय में किसी प्रकार की कानूनी खामी नहीं है।

याचिका में कहा गया है कि गृह मंत्रालय के माध्यम से केंद्र ने इस न्यायालय में अपील पर सुनवाई के दौरान कहा था कि हाईकोर्ट के दो जुलाई, 09 के फैसले में कोई कानून गलती नहीं है और इसी वजह से केंद्र की ओर से हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की गई थी।

सरकार ने तीसरे पक्ष के औचित्य पर उठाया सवाल
सरकार ने इस मामले में तीसरे पक्ष के औचित्य पर भी सवाल उठाया है, जिनकी अपील पर शीर्षस्थ अदालत ने फैसला सुनाया है।

याचिका के अनुसार हाईकोर्ट के निर्णय को अधिकांश तीसरे पक्षों ने ही चुनौती दी थी जो हाईकोर्ट में पक्षकार नहीं थे। सर्वोच्च अदालत को ऐसी स्थिति में विचार करने के चरण में ही उन याचिकाओं को खारिज कर देना चाहिए था।

क्योंकि कानूनों की संवैधानिकता का बचाव करना तीसरे पक्ष का नहीं, बल्कि राज्य का कर्तव्य है। सरकार ने सर्वोच्च अदालत की इस टिप्पणी पर भी सवाल उठाया है कि हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं देने के केंद्र के फैसले के बावजूद संसद को कानून में संशोधन की राय दी गई।

वसुंधरा राजे के दो मंत्रियों पर मर्डर का केस

Convicted minister in vasundhra raje

खास-खास

दोनों पर फर्जी एनकाउंटर आरोप
  • राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे ने 12 मंत्रियों को दिलाई शपथ
  • राजे के मंत्रिमंडल में एक भी महिला नहीं
राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मंत्रिमंडल के 12 सदस्यों को शुक्रवार को राजभवन में शपथ दिलाई गई। इन 12 मंत्रियों में से दो ऐसे विधायक (गुलाब चंद कटारिया व राजेंद्र राठौड़) भी हैं, जिन पर हाई प्रोफाइल मर्डर जैसे मामले दर्ज हैं।

राजे के मंत्रिमंडल में एक भी महिला को स्थान नहीं दिया गया जबकि इस बार चुनाव में भाजपा की 22 महिलाएं जीती हैं। राज्यपाल मारग्रेट अल्वा ने नौ कैबिनेट और तीन राज्य मंत्री को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाई।

भाजपा की पिछली सरकार में गृह मंत्री रह चुके कटारिया गुजरात में सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर में आरोपी हैं। इसी साल सीबीआई ने उनके खिलाफ अतिरिक्त आरोप पत्र दायर किया है। हालांकि मुंबई कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी है।

जबकि राजेंद्र सिंह राठौड़ को सीबीआई ने दारा सिंह फर्जी एनकाउंटर केस में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दोनों को ही कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई है।

इसके अलावा काली चरण सर्राफ , कैलाश मेघवाल, सांवर लाल जाट, प्रभु लाल सैनी, गजेंद्र्र सिंह खिवसर, युनूस खान और नंदलाल मीणा ने कैबिनेट मंत्री तथा अरुण चतुर्वेदी, अजय सिंह और हेम सिंह भड़ाना ने राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली।

वसुंधरा के मंत्रिमंडल में दो-दो राजपूत, वैश्य व जाट हैं तथा एक-एक मुस्लिम, माली, एससी, एसटी, गुर्जर व ब्राह्मण नेता को शामिल किया गया है।

लवली की गुगली, 'आप' को झटका

congress attack on aap, may not give support to make govt
हाल में हुए विधानसभा चुनावों में सबसे दिलचस्प खेल दिल्ली की राजनीति में दिखा। ऐसा लग रहा था कि बार-बार फैसला टालने के बाद आम आदमी पार्टी सोमवार को सरकार बनाने से जुड़ा ऐलान कर सकती है। लेकिन अब इसमें नया पेंच आ गया है।

गुरुवार को दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए गए अरविंदर सिंह लवली अगले ही दिन एक बयान देकर हड़कंप मचा दिया है। लवली ने आम आदमी पार्टी और केजरीवाल पर जोरदार हमला बोला।

देखें:- वाराणसी में मोदी, एक्सक्लूसिव तस्वीरें

लवली ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने जनता से झूठे वादे किए थे और कांग्रेस ने उसकी पोल खोलने के लिए समर्थन देने पर हामी भरी।

लवली ने कहा, "हमने किसी पार्टी को समर्थन देने की बात नहीं की है, हम जनादेश का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि लोगों ने हमें नहीं दूसरी पार्टी को चुना। हमने आप को बाहर से समर्थन देने की बात कही थी और उसके कामकाज में कोई दखल नहीं देंगे।"

दिल्लीः 'आप' बनाएगी सरकार, ऐलान बाकी

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केजरीवाल को समर्थन देने का फैसला इसलिए हुआ, ताकि आम आदमी पार्टी सरकार बनाए और जनता को यह पता चल सके कि उन्होंने जनता को धोखा दिया है। वह दरअसल, बहाने खोज रहे हैं ताकि जिम्मेदारी से भागा जा सके।

लवली ने कहा कि अगर आम आदमी पार्टी को जनादेश पर भरोसा होता, अपने आप पर भरोसा होता, तो वह अब तक सरकार बना लेती।


लवली ने कहा, 'आम आदमी पार्टी कांग्रेस को लेकर लोगों को गुमराह कर रही है। कांग्रेस का समर्थन आप के घोषणापत्र को है न कि पार्टी को। कांग्रेस केवल उन्हें विधानसभा में समर्थन करेगी। यह साफ है कि कांग्रेस सरकार का हिस्सा नहीं होगी। आम आदमी पार्टी को दिल्ली की जनता ने वो‌ट दिया है और हम उसका सम्मान करते हुए समर्थन कर रहे हैं।'

लवली ने कहा कि कांग्रेस का संगठन कमजोर नहीं है। हर हार से नई सीख मिलती है। इसलिए कांग्रेस की कोशिश रहेगी कि वह आम लोगों के संपर्क में आए।

इस जोरदार हमले के बाद अब केजरीवाल और उनकी पार्टी के जवाब का इंतजार है, जो पहले भी कह चुकी है कि कांग्रेस कभी भी उनकी सरकार गिरा सकती है, इसलिए वह अब तक सरकार बनाने का फैसला नहीं कर सके हैं।

लवली ने कहा आप एसएमएस का नाटक खेल रही है, लेकिन किसी को नहीं पता कि इनमें क्या आ रहा है और क्या नहीं।

इससे पहले खबर आ रही थी कि जब आप सरकार बनाने के बारे में गंभीरता से सोच रही है, तो कांग्रेस उसे समर्थन न देने का फैसला कर सकती है।

LIVE: पुजारा का शतक, भारत को बड़ी बढ़त

LIVE: 3rd day of Johannesburg test
गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के बाद चेतेश्वर पुजारा के शानदार शतक और विराट कोहली के अर्द्धशतक की मदद से भारत ने पहले टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका पर शिकंजा कस लिया है।

पहली पारी में 36 रन की अहम बढ़त लेने के बाद भारत ने मैच के तीसरे दिन दूसरी पारी में खबर लिखे जाने तक दो विकेट पर 224 रन बना लिए थे और उसकी बढ़त 260 रन की हो चुकी थी।

चेतेश्वर पुजारा 101 और विराट कोहली 52 रन बनाकर खेल रहे थे। दोनों तीसरे विकेट के लिए लगभग पांच रन प्रति ओवर की औसत से 131 रन जोड़ चुके थे। भारत ने पहली पारी में 280 रन बनाए थे।

पुजारा और कोहली की साझेदारी को तोड़ने के लिए कप्तान ए बी डीविलियर्स ने अपने सात गेंदबाजों का इस्तेमाल किया लेकिन सबके सब असहाय नजर आए।

यहां तक की डीविलियर्स ने खुद विकेटकीपिंग पैड खोलकर गेंदबाजी थामी लेकिन वह भी इन दोनों दिग्गजों को डिगा नहीं सके। हालांकि दूसरी पारी में भी शुरुआत एक बार फिर खराब रही थी और ओपनर शिखर धवन मात्र 15 रन बनाकर आउट हो गए।

पुजारा ने यहीं से मोरचा संभाला और मुरली विजय के साथ दूसरे विकेट के लिए 70 रन की साझेदारी निभाकर टीम को इस झटके से उबार लिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना पहला टेस्ट शतक पूरा किया।

पुजारा को हालांकि 51 रन के व्यक्तिगत स्कोर पर एक जीवनदान भी मिला था। इससे पहले तेज गेंदबाजों जहीर खान और इशांत शर्मा ने चार-चार विकेट लेकर दक्षिण अफ्रीका को पहली पारी में 244 रन पर ढेर कर दिया।

दक्षिण अफ्रीका ने सुबह छह विकेट पर 213 रन से आगे अपनी पारी को बढ़ाया लेकिन लंच से पहले 75.3 ओवर में उसकी पूरी टीम सिमट गई। जहीर ने दिन के चौथे ओवर में ही दूसरे दिन के नाबाद बल्लेबाज वर्नोन फिलेंडर को 59 रन पर आउट कर दिया।

फिलेंडर ने फाफ डू प्लेसिस के साथ सातवें विकेट के लिए 80 रन की साझेदारी निभाई। डू प्लेसिस भी जहीर की गेंद पर महेंद्र सिंह धोनी को कैच थमाकर चलते बने जबकि डेल स्टेन को इशांत शर्मा ने अपना शिकार बनाया।

जहीर फिर मोर्ने मोर्कल को बोल्ड कर दक्षिण अफ्रीकी पारी का अंत कर दिया। दक्षिण अफ्रीकी टीम सुबह 9.3 ओवर में मात्र 31 रन ही और जोड़ सकी।

चुनावी फाइनलः गांधी फैमिली पर मोदी के हमले तेज

namo in vijay shankhnaad rally in varanasi, attacks gandhi family
पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के बाद शुक्रवार को सियासी पारा एक बार फिर चढ़ा और बनारस में भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने गांधी परिवार पर हमला बोला।

विजय शंखनाद रैली को संबोधित करते हुए नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी पर तंज कसा। उन्होंने कहा, "कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि गरीबी-वरीबी कुछ नहीं होती। सिर्फ मन की अवस्‍था होती है। सच यह है कि शाम को घर में जब चूल्‍हा न जले तो पता चलता है कि गरीबी क्या होती है?"

देखें:- वाराणसी में मोदी, एक्सक्लूसिव तस्वीरें

मोदी ने कहा कि चुनाव करीब आते हैं, तो कांग्रेस गरीब-गरीब की माला जपने लगती है और सोचते हैं कि उनका साथ मिल जाए, तो नैय्या पार हो जाए। अगर गरीबों को तबाह करने का दोषी है, तो एक परिवार है। इनकी मान‌सिकता भी खराब है। गरीबी क्या होती है, इसे देखने के लिए हमें जाना नहीं पड़ता, क्योंकि हमने बचपन गरीबी में बिताया है।

मजदूर, चायवाला भी बन सकता है पीएम
गरीबों से कनेक्‍शन बनाने के लिए मोदी ने एक बार फिर अपनी 'आम आदमी' की छवि को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि मैं हैरान हूं कि कांग्रेस गरीबों से कितनी नफरत करती है। यूपीए के एक नेता ने कहा कि चायवाला भी कभी पीएम बन सकता है!

मोदी की विजय शंखनाद रैली, कब-कब क्या हुआ?

भाजपा के पीएम इन वेटिंग ने सवाल किया कि क्या चाय बेचकर, मेहनत करके खड़ा होना पाप है? गरीबों की बात करने वाले लोग खुलेआम बोल रहे हैं कि क्या चाय बेचने वाला कभी पीएम बन सकता है?

अगर देश की जनता आशीर्वाद दे, तो खेत में काम करने वाला भी पीएम बन सकता है। फुटपाथ पर पॉलिश करने वाला भी पीएम बन सकता है। हमें चाय बेचना मंजूर है, देश बेचना मंजूर नहीं।

narendra modi
















किसानों को रडार पर लेते हुए उन्होंने कहा, "दिल्ली की सरकार धान को सड़ने देती है। सुप्रीम कोर्ट कहता है कि गरीबों में बांट दो। लेकिन सरकार उन्हें सड़ने देती है। जिस किसान ने पसीना बहाकर धान पैदा किया, उसे 80 पैसे की दर से शराब पीने वालों को बेच देते हैं। हैरानी है कि किसी देश के शासक ऐसे हो सकते हैं। किसान और गरीब की मेहनत इस तरह लुटाई जाती है। यह किसानों का अपमान है। देश के गरीबों का मजाक है यह।"

उत्तर प्रदेश को लुभाने की कोशिश
लोकसभा चुनाव करीब हैं और प्रदेश में 80 सीटें रखने वाला उत्तर प्रदेश सियासी ‌लहजे से बेहद अहम है। मोदी को यह बात पता है। यही वजह है कि उन्होंने यूपी पर खास ध्यान दिया।

मोदी ने कहा, "उत्तर प्रदेश के बारे में कहा जाता है कि यहां किसी एक दल की सरकार नहीं बनती। यह राज्य का अपमान है। क्या उत्तर प्रदेश का इस्तेमाल केवल सांसदों की संख्या बढ़ाने के लिए है? मेरी सोच इतनी सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश के विकास के बिना हिंदुस्तान का विकास नहीं हो सकता।"

उन्होंने कहा, "यूपी देश के विकास के इंजन के रूप में उभर सकता है। इसे सांसदों की संख्या बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाना गलत है। आप रामराज्य की विरासत के धनी हो। फिर भी मुसीबत क्यों हैं? क्योंकि आपने सही सरकार नहीं चुनी। सही नेता नहीं चुना। जिस दिन ऐसा होगा, उस दिन उत्तर प्रदेश देश को आगे बढ़ाएगा।"

गंगा की सफाई का मुद्दा उठाया
बनारस में रैली थी, सो गंगा का जिक्र भी होना था और मोदी ने यही किया। उन्होंने कहा, "यूपीए सरकार ने उत्साह और उमंग के साथ गंगा साफ करने के लिए योजना बनाई। खूब प्रचार किया। लोगों को लगा कि अब कुछ होगा। भरोसा हुआ, तो उन्हें सत्ता भी दी। लेकिन उन लोगों ने पांच साल में तीन मीटिंग करने के सिवा कोई काम नहीं किया।"


पढ़ें,2014: कौन बनेगा प्रधानमंत्री राहुल, मोदी या कोई और?


वह बोले, "गंगा के नाम पर हजारों करोड़ लुटाए गए। जनता जवाब मांगती है। गंगा साफ करने के लिए क्या किया, कब किया, कैसे किया? जो गंगा नहीं संभाल सकते, देश क्या संभालेंगे। अगर गंगा साफ करनी है, तो पहले दिल्ली और लखनऊ को शुद्ध करना होगा।"

वरिष्ठ नेता रैली में मौजूद
रैली में मंच पर मोदी के साथ भाजपा अध्यक्ष राजनाथ ‌सिंह, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी, केसरीनाथ त्रिपाठी, लक्ष्मीकांत वाजपेयी, रामेश्वर चौरसिया, अमित शाह और पार्टी के अन्य मौजूद थे।

rajnath singh
















इस मौके पर पार्टी अध्यक्ष राजनाथ ने कहा हालिया पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने अपना विजय पताका फहराया है। दिल्ली में कांग्रेस एक इनोवा कार में सिमट गई है। पांचवें राज्य में कांग्रेस को सांत्वना पुरस्कार मिला है।

बाबा विश्वनाथ मंदिर भी गए
रैली स्‍थल पर पहुंचने से पहले नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। पुजारी के मुताबिक उन्होंने वहां देश का पीएम बनने का संकल्प लिया। बाहर निकलते वक्‍त वह कुछ मुस्लिमों से भी मिले।

इससे पहले मोदी के बनारस पहुंचने पर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उन्हें काले झंडे दिखाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया।