Wednesday, January 29, 2014

'पति मुझे अजनबी लोगों के साथ कमरे में बंद कर देता है'

delhi woman complaints against in laws for sex trade
एक युवती ने पति और ससुरालवालों पर उससे वेश्यावृत्ति कराने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि रोज घर में अजनबी लोग आते हैं और उनके साथ उसे एक कमरे में बंद कर दिया जाता है।

पुलिस ने युवती की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पीड़ित युवती दिल्ली की रहने वाली है और उसकी ससुराल गाजियाबाद जिले के लोनी में है।

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28 वर्षीय पीड़िता की शादी नौ मई, 2003 को मुस्तफाबाद कॉलोनी में एक व्यक्ति से हुई थी। उसने बताया कि शादी के बाद से ही ससुराल में उससे वेश्यावृत्ति कराई जा रही थी। रोजाना घर में नए-नए लोग आते थे, उनके साथ उसे एक कमरे में बंद कर दिया जाता था।

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पीड़िता का कहना है कि विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की जाती थी। दो बच्चे होने के बाद भी उसके साथ यह घिनौना सुलूक जारी रहा।

उसका आरोप है कि आठ वर्ष से उसे मायके नहीं भेजा गया। कुछ दिन पूर्व वह किसी तरह ससुराल से भागकर मायके पहुंची और परिजनों को आपबीती बताई।

पीड़िता ने मायके वालों के साथ लोनी थाने पहुंचकर पति, सास, दो जेठ, देवर, दो जेठानी, देवरानी और ननद के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया है।

प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में हंगामा, नारेबाजी

protest after manmohan singh's speech at the inauguration of national waqf development corporation
विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मनमोहन स‌िंह के भाषण के दौरान एक शख्स ने हंगामा किया है। हंगामा करने वाले शख्स को सुरक्षाकर्मियों ने विज्ञानभवन से बाहर निकाल दिया है।

ये कार्यक्रम नेशनल वक्फ डेवलेपमेंट ने आयोजित किया है, जिसमें अल्पसंख्यक मामलों की चर्चा की जा रही है।

हंगामा करने वाले शख्स का नाम डॉ फहीम बेग है। फहीम बेग ने बताया है कि अल्पसंख्यकों से जुड़ी योजनाओं पर बात करने के लिए उसने प्रधानमंत्री से मिलने के लिए कई बार कोशिश की लेकिन उन्होंने समय नहीं दिया।

वहीं, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के रहमान खान ने बताया कि यूपीए चेयर पर्सन सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हंगामा करने वाले शख्स को मिलने के लिए बुलाया है।

डेरामुखी आशुतोष जी महाराज ब्रह्मलीन

divya jyoti jagriti sansthan founder ashutosh ji maharaj entered in akhand samadhi
पंजाब के जालंधर जिले से अभी-अभी एक बड़ी खबर आ रही है। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आशुतोष महाराज ज्योति ज्योत समा गए हैं।

मंगलवार रात को साढ़े 12 बजे के आसपास अपना शरीर त्याग दिया। बकायदा अपोलो अस्पताल के चिकित्सकों की टीम ने उनका चेकअप किया और क्लीनिकल डेथ घोषित कर दिया लेकिन डेरा प्रबंधकों व उनके अनुयायियों का कहना है कि महाराज उच्च समाधि में लीन हैं और वह अकसर कई दिनों के लिए अपना शरीर त्यागकर चले जाते हैं और वापस आ जाते हैं। प्रशासन की तरफ से पहुंचे अधिकारियों व पुलिस को डेरे के भीतर नहीं जाने दिया गया।

नूरमहल स्थित महाराज आशुतोष जी के डेरे से मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार रात को साढ़े 12 बजे महाराज ध्यान में बैठे थे, उनको सांस लेने में कुछ दिक्कत हुई तो तत्काल चिकित्सकों की टीम को बुलाया गया। बकायदा चेकअप के लिए अपोलो अस्पताल के चिकित्सकों की टीम पहुंची, जिन्होंने रात को करीब ढाई बजे के आसपास चेक किया और कहा कि महाराज आशुतोष जी ब्रह्मलीन हो गए हैं।

डेरे के अंदर से यही सूचना आ रही थी कि महाराज आशूतोष गहन समाधि में है और उन्होंने सारी संगत को ध्यान करने का संदेशा दिया है। संगत डेरे में ध्यान में बैठकर जप करने लगे।



'फंडिंग के बारे में जानकारी नहीं दे रही है आप'

Centre says to HC AAP leaders not providing info on funding
केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में चल रहे एक मामले में कहा है कि आम आदमी पार्टी के नेता पार्टी को मिले फंड के बारे में कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।

पीटीआई के मुताबिक़ हाई कोर्ट में गृह मंत्रालय का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल राजीव मेहरा ने कहा, "हमने चार नवंबर 2013 को भेजे अपने एक पत्र के ज़रिए पार्टी से बैंक अकाउंट और कुछ अन्य जानकारियां मांगी थी जो फंडिंग से जुड़ी थीं। इसके बाद हमने एक और पत्र भेजा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।"

इस बीच जस्टिस प्रदीप नादरजोग की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने याचिका दायर करने वाले वकील एमएल शर्मा से कहा है कि वो अपनी जनहित याचिका में आम आदमी पार्टी को भी शामिल करें।

एमएल शर्मा ने आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेता अरविंद केज़रीवाल और पार्टी के कुछ अन्य संस्थापक सदस्यों के ख़िलाफ़ एक आपराधिक मामला दायर कर के उन पर नियमों की अवहेलना करते हुए विदेशों से फंड लेने का आरोप लगाया है।

याचिका
खंडपीठ का कहना था, ''आम आदमी पार्टी एक रजिस्टर्ड राजनीतिक दल है। क्या आपने उसे इस याचिका का हिस्सा बनाया है। पांच फरवरी को मामले की अगली तारीख से पहले आप नयी याचिका में ये संशोधन कर के पेश करें। ''

याचिकाकर्ता ने केज़रीवाल के अलावा आप के नेता मनीष सिसौदिया, शांति भूषण और प्रशांत भूषण के नाम अपनी याचिका में शामिल किया था।

इससे पहले हाई कोर्ट ने केंद्र से कहा है था कि वो आम आदमी पार्टी के आय के स्रोतों से जुड़े अकाउंटों को एक बार फिर देखे।

हाई कोर्ट के इस आदेश से पहले केंद्र ने एक रिपोर्ट फाइल की थी जिसमें बताया गया था कि हाई कोर्ट की एक अन्य पीठ के समक्ष केंद्र ने पिछले साल टीम अन्ना की सिविल सोसायटी से जुड़े अकाउंटों का ब्योरा सौंपा था। यह ब्योरा भी एमएल शर्मा की एक अन्य याचिका पर था।

बरखा की छुट्टी तय, केजरीवाल ने दिए संकेत

Delhi govt proposes name of Hindi novelist for DCW post
दिल्ली महिला आयोग की नई अध्यक्ष जानी-मानी साहित्यकार एवं नारीवादी लेखिका मैत्रेयी पुष्पा को बनाए जाने की संभावना है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा क‌ि मैत्रेयी पुष्पा अत्यंत महत्वपूर्ण साहित्यकार एवं सामाजिक शख्सियत हैं उन्हें अध्यक्ष बनाकर इस पद पर किसी राजनीतिक व्यक्ति को बिठाने की वर्षो से चली आ रही परंपरा तोड़ी जा रही है।

केजरीवाल बोले टूटेगी परंपरा
केजरीवाल ने कहा कि अब तक होता यह रहा है कि विभिन्न सरकारी संस्थाओं में उन्हीं पार्टियों के लोगों को नियुक्त किया जाता रहा है जिन पार्टियों की सरकारें होती थीं।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान विभिन्न संस्थाओं में कांग्रेस ने अपने लोगों को बिठा रखा है लेकिन अब दिल्ली महिला आयोग के अध्यक्ष के पद पर एक निष्पक्ष शख्सियत तथा महत्वपूर्ण साहित्यकार को नियुक्त किया जा रहा है। हालांकि सुश्री पुष्पा ने मीड‌िया को बताया क‌ि उन्हें अभी इस बात की आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।

गौरतलब है कि दिल्ली महिला आयोग की मौजूदा अध्यक्ष बरखा सिंह ने दिल्ली सरकार के कानून मंत्री सोमनाथ भारती के इस्तीफे की मांग की थी और इसके बाद से उनके हटाए जाने की चर्चा तेज हो गई।

बरखा सिंह का कार्यकाल अभी तीन साल शेष है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के सिकुर्रा गांव में जन्मी मैत्रेयी पुष्पा जानी मानी उपन्यासकार एवं कहानीकार हैं।

उनके प्रमुख उपन्यासों में स्मृति दंश चालक, अल्मा कबूतरी, कहैं ईसुरी फाग, बेतवा बहती रही, चिन्हार, इदन्नमम और गुनाह बेगुनाह प्रमुख है। चिन्हार, ललमनिया, त्रिया हठ और पगला गयी भागवती जैसी उनकी कहानियां चर्चित रही हैं।

Tuesday, January 28, 2014

कांग्रेस-नेशनल कांफ्रेंस में झगड़ा, उमर देंगे इस्तीफा?

 congress natonal conference coalition in verge of split omar abdullah may resign
जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-नेशनल कांफ्रेंस की गठबंधन सरकार खतरे में है। माना जा रहा है कि एक विवाद के चलते प्रदेश के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपने पद से इस्तीफा भी दे सकते हैं।

दरअसल उमर अब्दुल्‍ला राज्य में 700 नई प्रशासकीय इकाई का गठन करने के पक्ष में हैं वहीं कांग्रेस इस फैसले में रोड़े अटका रही है।

पढ़ें, उमर ने मेहर को बताया, कश्मीर का हल

नेशनल कांफ्रेंस को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के इस फैसले से पार्टी को आगामी लोकसभा चुनाव और अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में फायदा मिलेगा।

इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दोनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं की बीच बैठक हो चुकी है पर ये असफल रही। इस बैठक में प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी, सैफुद्दीन सोज और केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने शिरकत की थी।

नेशनल कांफ्रेंस के सूत्रों का कहना है कि विवाद सुलझते न देख उमर अब्दुल्ला अपने पद से हटने पर विचार कर रहे हैं। सीएम को लगता है कि कांग्रेस जानबूझकर प्रशासनिक इकाई के गठन में रुकावट पैदा कर रही है।

मोदी वीजा मामले में हस्तक्षेप से हाईकोर्ट का इंकार

high court decision in modi visa case
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को वीजा नहीं देने की मांग करने वाले सांसदों के खिलाफ आदेश पारित करने से हाईकोर्ट ने इंकार कर दिया है।

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि मामला न्यायिक पुनर्विलोकन की श्रेणी का नहीं है। न्यायालय को इस मामले में हस्तक्षेप करने का क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है।

जनहित याचिका में लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा के सभापति को समादेश जारी कर उक्त सांसदों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश देने की मांग की गई थी।

उदित चंद्रा द्वारा दाखिल जनहित याचिका में कहा गया कि लोकसभा और राज्यसभा के करीब दर्जन भर सांसदों ने अमेरिकी राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मांग की थी कि नरेंद्र मोदी को अमेरिका वीजा न दे क्योंकि उन पर गुजरात में हुए नरसंहार में शामिल होने का आरोप है।

याचिकाकर्ता का कहना था कि सांसदों ने घरेलू मामले को विदेश में उठाकर देश की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाई है। उनके कार्य से संसद की गरिमा को भी ठेस पहुंची है। ऐसे सांसदों को अयोग्य करार देने के लिए आदेश देने की मांग की गई।

खंडपीठ ने याची की मांग को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि हाईकोर्ट को अंतर्निहित शक्तियों के तहत ऐसा आदेश देने का क्षेत्राधिकार नहीं है। सुप्रीमकोर्ट ने राजाराम पाल बनाम लोकसभा स्पीकर के मामले में न्यायिक पुनर्विलोकन का पैरामीटर तय कर दिया है। यह मामला न्यायिक पुनर्विलोकन की परिधि से बाहर है। याची चाहे तो सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपनी बात रख सकता है।